Surface Web, Deep Web And Dark Web Kya hai? Explained In Hindi

By | October 18, 2021

Surface Web, Deep Web And Dark Web Kya hai? Explained In Hindi – अब हर व्यक्ति के मन में यही सवाल उठ रहा होगा कि इसे तीन भागों में बांटने की वजह क्या है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसे इसलिए बांटा गया है ताकि आप इसे अच्छे से समझ सके। तो बिना वक्त गवा है चले हम डार्क वेब इंटरनेट के बारे में जानकारी साझा करते हैं।

मुख्य रूप से तीन भागों में इंटरनेट को बाटा गया है। जो कि इस प्रकार है:-

  1. Dark Web Internet
  2. Surface Web Internet
  3. Deep web Internet

क्या है डार्क वेब इंटरनेट और क्यों कहते हैं इसे डार्क वेब इंटरनेट ?

डार्क वेब के नाम से ही आपको पता चलता है कि ये इलीगल है और यही वजह है कि इसको लोग डार्क वेब इंटरनेट कहते हैं। यह इंटरनेट का सबसे Risky Part है।

Attention

हम आपसे आग्रह करना चाहते हैं कि आप गलती से भी डार्क वेब इंटरनेट का उपयोग ना करें क्योंकि यह इलीगल काम है। यह पार्ट सर्फेस वेब, दीप वेब के पश्चात वाली लेटर में मौजूद रहता है। इंटरनेट की दुनिया का यह एक ऐसा इलीगल पार्ट है जहां पर कोई भी किसी भी वक्त कुछ भी कर सकते हैं। हमारे कहने का तात्पर्य यह है कि यह कुछ भी मुमकिन है परंतु इसको एक्सिस करना भी काफी कठिन होता है।

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सर्फेस वेब इंटरनेट क्या है ?

सर्फेस वेब को क्लीयरनेट और विजिबल वेब भी कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक, यह सर्चिंग के लिए इंडेक्सबल होता है। इसे कोई भी व्यक्ति काफी सरलता से एक्सिस कर सकते हैं क्योंकि यह हर व्यक्ति के लिए विजिबल होता है। सर्फेस वेब इंटरनेट वर्ल्ड वाइड वेब का एक पार्ट है। इसे आप किसी भी सर्च इंजन के माध्यम से सर्च कर एक्सिस कर सकते हो।

यदि हम सरल शब्दों में समझे, तो यह एक ऐसा पार्ट है जिसका इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी का भी इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं लेना होता है। काफी कम व्यक्तियों को यह जानकारी प्राप्त होगी कि सर्फेस वेब पूरे इंटरनेट का केवल 5 प्रतिशत पार्ट के आस पास है और तकरीबन 95 प्रतिशत पार्ट डीप वेब और डार्क वेब के भीतर होता है और यह एक काफी बड़ा पार्ट है।

क्या है Deep web और क्यों कहते हैं इसे डीप वेब ?

डीप वेब में कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार से डाटा स्टोर कर सकते हैं। जानकारी के लिए बता दे कि ये डाटा Confidential भी हो सकता है। ये मुमकिन है कि इसमें कोई भी बड़ी कंपनी कोई भी गुप्त डाटा स्टोर कर सकती है। यदि हम उदाहरण के तौर पर समझे तो डीप वेब में किसी organization का हो सकता है, गवर्नमेंट का हो सकता है, या चाहे वो किसी भी यूनिवर्सिटी का हो सकता है तो कहने का तात्पर्य यह है कि डाटा तो किसी का भी हो सकता है।

जितने भी जरूरी और बड़े Researches है वो भी डेटाबेसेस स्टोर्ड होते हैं या फिर जितने भी बड़े बड़े बैंक के जितने भी जरूरी जानकारी है और गवर्नमेंट के जितने भी गुप्त प्रोजेक्ट है और फाइल्स है वो सब डीप वेब के भीतर ही होता है।

निष्कर्ष

दोस्तों, आशा करता हूं कि आप इस लेख में दिए गए जानकारी को अच्छे से समझ गए होंगे। लेकिन मैं आपसे एक बार फिर आग्रह करना चाहते हैं कि आप गलती से भी डार्क वेब इंटरनेट का उपयोग ना करें क्योंकि यह इलीगल काम और दंडनीय है।